एकादशी को तुलसी जी को जल चढ़ाना चाहिए या नहीं

तुलसी का पौधा किसी भी जगह के वास्तु दोषों को समाप्त कर देता है। प्राचीन काल से तुलसी एक औषधि के रूप में प्रयोग की जा रही है। इसके धार्मिक महत्व भी कई सारे हैं। ऐसा कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वह स्थान पूजनीय होता है और वहाँ किसी भी बीमारी या मृत्यु की संभावना भी कम हो जाती है। हालांकि, ध्यान रखें, घर में तुलसी लगाने के कुछ नियम भी है जैसे:

  • तुलसी के पौधे के आस-पास आप पूर्ण स्वच्छता और शुद्धता बनाए रखें। रविवार छोड़कर बाकी सभी दिनों में तुलसी जी को जल चढ़ा सकते हैं और ऐसा करने से आपके परिवार के सदस्यों की आयु लंबी होगी।
  • तुलसी के पत्तों को चबाकर नहीं खाना चाहिए तथा कुछ खास दिनों में तुलसी के पत्ते तोड़ने भी नहीं चाहिए जैसे रविवार, एकादशी तथा सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय।

क्या एकादशी को तुलसी जी की पूजा करनी चाहिए?

एकादशी की तिथि को भगवान शिव की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। एक वर्ष में 24 एकादशी की तिथियाँ पड़ती है और इनमें से सबसे फलदाई निर्जला एकादशी मानी जाती है। इस दिन लोग निर्जला व्रत करते हैं और तुलसी जी की पूजा अवश्य ही करते हैं लेकिन बिना उनका पत्ता तोड़े और बिना उन पर जल चढ़ाये, ऐसा करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। माँ तुलसी, लक्ष्मी माता का ही प्रतीक हैं और उनकी पूजा करने से लक्ष्मी माँ भी प्रसन्न होती हैं और घर में सभी देवी-देवताओं का वास होता है।

एकादशी को तुलसी जी को जल चढ़ाना चाहिए या नहीं

तुलसी जी को जल कब नहीं चढ़ाना चाहिए?

प्राचीन समय से हिंदू धर्म में घर के अंदर तुलसी का पौधा लगाने और उस पर हर दिन जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। स्नान-आदि कर के शुद्ध होने के बाद आप तुलसी जी को जल दें, परंतु इसके साथ ही आप कुछ बातों का विशेष ध्यान ज़रूर रखें, जैसे-

  • तुलसी के पौधे को रविवार और एकादशी के दिन जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
  • बाकी दिनों में तुलसी के पौधे को ग़रीबों को दान करने के बाद सही मात्रा में ही जल चढ़ाना चाहिए। अधिक मात्रा में जल चढ़ाने से भी उसकी जड़ सड़ जाती है और पौधा खराब हो जाता है।
  • बारिश के सीज़न में तुलसी के पौधे को हफ्ते में दो बार ही जल दें।

रविवार और एकादशी को तुलसी जी को पानी क्यों नहीं देना चाहिए?

हिंदू धर्म में प्रत्येक देवी देवताओं के पूजन आदि के लिए कुछ विशेष दिन तय किए गए हैं, जैसे रविवार का दिन भगवान विष्णु की साधना के लिए बहुत ही अच्छा माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान विष्णु को तुलसी जी अति प्रिय हैं, इसलिए तुलसी जी का दूसरा नाम विष्णुप्रिया भी है।

रविवार के दिन तुलसी जी श्री विष्णु भगवान के लिए व्रत रखती हैं और यदि उस दिन उन्हें जल अर्पित किया जाए या उनके पत्ते तोड़े जायें तो उनका व्रत भंग होता है, जो कि ग़लत होगा। इसलिए रविवार के दिन तुलसी जी के पत्तों को तोड़ना और उन्हें जल अर्पित करना बहुत ग़लत होता है, आप ऐसा बिल्कुल ना करें।

तुलसी जी के पास कौन सी पाँच चीजें नहीं रखनी चाहिए?

ऐसी मान्यता है कि कुछ चीज़ें तुलसी जी के आस-पास बिल्कुल नहीं रखी जानी चाहिए। ये मान्यतायें प्राचीन शास्त्रों में भी वर्णित हैं, जो कि यहाँ आपकी जानकारी के लिए बताई गई हैं-

  1. डस्टबिन: घर की सारी गंदगी, कूड़ा-करकट, इत्यादि डस्टबिन में डाली जाती है और चूँकि हम सभी तुलसी जी की पूजा करते हैं तो उनके आस-पास गंदी चीज़ों को नहीं रखा जाना चाहिए।
  2. झाड़ू: घर में झाड़ू से कूड़ा-करकट हटाया जाता है और इसको तुलसी जी के पास रखना उनका अनादर होगा।
  3. जूते: जूते पैरों में पहने जाते हैं और पैरों में पहनी जानी वाली चीज़ को ऐसी जगह नहीं रखा जाना चाहिए जहाँ पवित्रता रखते हैं और पूजा की जाती है।
  4. कैक्टस जैसे कांटेदार पौधे: तुलसी जी को स्त्री रूप और माँ समान माना जाता है। स्त्रियाँ कोमल होती हैं और कोई भी अपनी माँ के पास काँटेदार वस्तुएँ नहीं रखता है, इसलिए आप भी ना रखें।
  5. शिवलिंग: शंकर जी को तुलसी जी का पत्ता नहीं चढ़ाया जाता क्योंकि शास्त्रों में वर्णित एक कथा के अनुसार वह वर्जित है, परंतु कुछ लोग अज्ञानता के कारण शिवलिंग को तुलसी के पौधे पर रख देते हैं। वैसे भी शिवलिंग को पूजा कमरे के अलावा कहीं और रखा भी नहीं जाना चाहिए, इसलिए आप भी ना रखें।

तुलसी जी की पूजा करने के फायदे

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हिन्दू धर्म की मान्यतायें शास्त्र-सम्मत और वैज्ञानिक आधारों पर, तपस्यारत ऋषि-मुनियों द्वारा बनायी गयीं थीं। तुलसी जी की पूजा भी ऐसी ही एक प्राचीन मान्यता के आधार पर की जाती है। आध्यात्मिक तौर पर इससे घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

इससे वातावरण को शुद्ध और सात्विक रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा अगर आप वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखें तो तुलसी का पौधा एक बहुत अच्छा ऑक्सीजन प्लांट माना जाता है। यह 20 घंटे तक ऑक्सीजन और बाकी के चार घंटे ओज़ोन देता है।

यह पौधा नवजात ऑक्सीजन भी बनाता है जो वातावरण से कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी ज़हरीली गैसों को भी अवशोषित कर के हटाता है। इन्हीं कारणों से यह ऑक्सीज़न देने के साथ-साथ एक अच्छा एयर प्यूरिफाईंग प्लांट भी माना जाता है।

इसके पत्तों का काढ़ा बना कर पीने से ना केवल खाँसी-ज़ुखाम और ठंड से होने वाले बहुत से रोग ठीक हो जाते हैं बल्कि यह इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी बहुत असरदार साबित हुई है। इन आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारणों से तुलसी का पौधा घर में रखने से परिवार में सुख-शाँति रहती है, विवाहित जीवन भी सुखी रहता है और घर के सभी सदस्य स्वस्थ रहते हैं।

ऐसी मान्यता है कि यदि आपके घर पर लगाया गया तुलसी का पौधा अगर सूख रहा है तो इसका कारण उसके आस-पास कूड़ा-करकट जैसी अशुद्धता या फिर आपका उसमें ज़रूरत से कम या अधिक पानी डालना हो सकता है। इसलिए यह एक ऐसा पौधा है जिसकी ख़ूब मन से सेवा की जानी चाहिए और इसका पुण्य भी मिलता है।

इस तरह आप यदि सही तरीके से तुलसी जी की सेवा करेंगे और नियमित पूजा करेंगे तो निश्चय ही आपको उनका आशीर्वाद मिलेगा जो आपके घर में खुशहाली, अच्छा स्वास्थ्य और संपन्नता लाएगा।

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