मौनी अमावस्या कब है 2024, मौनी अमावस्या का महत्व क्या है? मौनी अमावस्या के दिन क्यों रहा जाता है मौन व्रत?

मौनी अमावस्या क्या है

माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं इस दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था। इस दिन व्रत रखने की परंपरा है। माना जाता है कि इस दिन जो व्यक्ति त्रिवेणी नदी में या गंगा नदी में स्नान करके दान करता है उसे कई गुना पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

अगर कोई व्यक्ति बाहर नहीं जा सकता तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करके भी दान पुण्य का लाभ उठा सकता है। इस दिन तिल, तिल का तेल, तिल के लड्डू, आंवला, कंबल तथा अन्न-धन का दान करने से सुख समृद्धि बढ़ती है।

मौनी अमावस्या में गंगा नदी जैसी बाकी पवित्र नदियों में ही स्नान क्यों करना चाहिए

पुराणो के अनुसार समस्त पवित्र नदियों और पतितपाविनी मां गंगा का जल इस दिन अमृत समान हो जाता है। इस दिन गंगा स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के करने के समान फल मिलता है। इस दिन व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान पुण्य तथा जाप करने चाहिए ऐसा करने से पूर्व जन्म के पाप भी दूर होते हैं।

मौनी अमावस्या में गंगा स्नान के समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए

स्नान मंत्र– गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती । नर्मदे सिंधु कावेरी जले अस्मिन सान्निधिम कुरु।

मौनी अमावस्या क्यों मनाई जाती है?

मौनी अमावस्या के साथ धार्मिक और ज्योतिष दोनों महत्व जुड़े हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब माघ महीने में चंद्रमा और सूर्य मकर राशि में एक साथ होते हैं तब मौनी अमावस्या मनाते हैं। सूर्य, चंद्रमा दोनों ही ग्रहों की ऊर्जा के प्रभाव से इस दिन का महत्व अधिक हो जाता है।

मौनी अमावस्या का महत्व क्या है

ज्योतिष में सूर्य को पिता और धर्म का सूचक कारक माना जाता है इसलिए मकर राशि में सूर्य चंद्र के एकत्र होने पर मौनी अमावस्या मनाई जाती है यही वजह है कि इस दिन दान दक्षिणा करने से पुण्य कई गुना बढ़ता है और मृत्यु के बाद जीवात्मा को उच्च गति प्राप्त होती है।

मौनी अमावस्या कब है 2024

माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या होती है। 2024 में 9 फरवरी को सुबह 8:02 से आरंभ होगी 10 फरवरी को सुबह 4:28 पर समाप्त होगी। इसलिए इस बार मौनी अमावस्या 9 फरवरी को ही मनाई जाएगी।

मौनी अमावस्या का महत्व क्या है ?

एक मान्यता के अनुसार अमावस्या के दिन व्रत रखने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पुण्य फलों की वृद्धि होती है, पितृ प्रसन्न होते हैं तथा उनका आशीर्वाद मिलता है जिससे सारे बिगड़े काम बन जाते हैं। गरुण पुराण में भी कहा गया है आज के दिन पितृ अपने वंशजों से मिलने आते हैं और कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखकर पवित्र नदी में स्नान दान व पितरों को भोजन अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं।

मौनी अमावस्या में क्या करना चाहिए?

मौनी अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद मिलता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। पितृ तर्पण करने के लिए नदी या घर में स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देकर पितरों का तर्पण करना चाहिए। इसके बाद किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। मौनी अमावस्या के दिन जरूरतमंदों को दान करना चाहिए।

मौनी अमावस्या में स्नान का शुभ समय क्या है ?

माघ अमावस्या यानी मौनी अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय 5:21 से लेकर 6:13 तक है। उस दिन इस समय यानी ब्रह्म मुहूर्त मे स्नान करना सर्वोत्तम पुण्य और लाभ देता है। मौनी अमावस्या के दिन पितरों को कैसे प्रसन्न करें? मौनी अमावस्या वाले दिन स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण करें उसके बाद पितरों की देवताओं की भांति विधि विधान से पूजा करें इस दिन पितृ सुक्तम का पाठ करना चाहिए इससे पितृ प्रसन्न होते हैं।

मौनी अमावस्या में क्या नहीं करना चाहिए?

मौनी अमावस्या के दिन तामसिक चीजों से दूर रहे नकारात्मक विचारों को अपने मन में ना लाये। मौनी अमावस्या के दिन किसी भी जरूरतमंद को खाली हाथ ना लौटाए। इस दिन मौन रहना चाहिए, किसी को अपशब्द ना कहें, विशेष रूप से बड़ों बुजुर्गों का अपमान नहीं करना चाहिए।

मौनी अमावस्या के दिन क्या होता है, आइए जानते हैं। माघ मास में पढ़ने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। शनिवार के दिन अमावस्या पढ़ने से इसे शनिश्चर्य अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन स्नान दान धर्म कार्यों से यज्ञ और कठोर तपस्या जितने फल की प्राप्त होती है।

मौनी अमावस्या के दिन क्यों रहा जाता है मौन व्रत ?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मन के देवता चंद्र देव हैं इस दिन चंद्रमा के दर्शन न होने से मन की स्थिति बिगड़ने लगती है इसलिए इस दिन मौन रहकर कमजोर मन को संयमित करने का विधान है मान्यताओं के अनुसार इस दिन मौन व्रत रखकर मन ही मन ईश्वर का जाप और दान करना चाहिए

मौनी अमावस्या को तर्पण और पिंडदान क्यों करते हैं

मौनी अमावस्या के दिन नदी के तट पर दक्षिण दिशा की तरफ अपना मुख करके जल में तिल मिलाकर पितरों को तर्पण दें और उसके निमित्त पिंडदान करें। इस उपाय को करने से घर में सुख समृद्धि आती है और पितृगण वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

मौनी अमावस्या का ज्योतिष महत्व भी है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस दिन सूर्य चंद्रमा एक साथ मकर राशि में प्रवेश करते हैं उसके पश्चात मौनी अमावस्या का पर्व मनाया जाता है इसलिए ज्योतिष शास्त्र में मौनी अमावस्या का महत्व बढ़ जाता है।

मौनी अमावस्या के दिन क्या दान करें?

मौनी अमावस्या के दिन कुछ वस्तुएं दान करने से देवताओं, पितरों दोनों की कृपा और आशीर्वाद बना रहता है। इस दिन काला तिल, चावल, तिल के लड्डू, गाय, जमीन, सोना, कपड़े, आंवला, तिल का तेल तथा धन आदि का दान करने से कुंडली में पितृ दोष भी दूर होता है।

मौनी अमावस्या के दिन तुलसी पूजन करने की सही विधि और लाभ क्या है?

मौनी अमावस्या के दिन पीले धागे में 108 गांठ बांधकर साथ ही साथ धागे को तुलसी के पौधे में बांधकर तुलसी जी की परिक्रमा करें और इस प्रकार विधिवत पूजन करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं तथा उनकी कृपा बनी रहती है।

इसके साथ ही इस दिन माता को कलावा चढ़ाने से कई तरह के लाभ व्यक्ति को मिलते हैं। धन-धान्य से संबंधित सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, इसलिए अगर आप मौनी अमावस्या को तुलसी पूजन करें तो ब्रह्म मुहूर्त मे करें, इससे और अधिक शुभ परिणाम मिलेंगे।

मौनी अमावस्या के दिन जीवन के कष्ट निवारण के लिए तुलसी पूजन की सही विधि क्या है ?

इस बार मौनी अमावस्या सर्वाधिक सिद्ध योग मे होने जा रही है। भगवान विष्णु के साथ तुलसी पूजन का विशेष महत्व है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके तुलसी पूजन सामग्री एकत्रित करें। माता तुलसी पर लाल चुनरी चढ़ाई जाती है।

ऐसा करने से व्यक्ति की हर परेशानियां दूर होती हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या के दिन तुलसी में जल नहीं चढ़ाना चाहिए बल्कि कच्चा दूध चढ़ाना चाहिए। घी का दीपक जलाएं ऐसा करने से सुख शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

मौनी अमावस्या स्नान के क्या लाभ है?

मौनी अमावस्या पर संगम तट या पवित्र नदियों पर स्नान किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या पर देवता और पितृ, प्रयागराज संगम तट पर आकर अदृश्य रूप से संगम में स्नान करते हैं। कहते हैं कि इस दौरान ब्रह्म मुहूर्त में गंगा में स्नान करने से लंबी आयु होती है और आरोग्य मिलता है। जो लोग गंगा तट पर जाकर स्नान नही कर पाते हैं वह ब्रह्म मुहूर्त में अपने घर में गंगाजल पानी में डालकर स्नान करते हैं।

मौनी अमावस्या के दिन महादान से क्या कष्टो का नाश होता है?

मौनी अमावस्या के दिन किये हुए दान को महादान कहा जाता है। इसलिए इस दिन अपनी योग्यता के हिसाब से जरूरतमंदों, गरीबों को आटा, चावल, कंबल, काले तिल तथा तिल से बनी वस्तुएं तथा मिठाई, चीनी, दूध आदि दान करना चाहिए ।

मौनी अमावस्या को पितृ दोष या सूर्य दोष से मुक्ति के उपाय?

मौनी अमावस्या को त्रिपिंडी श्राद्ध करना चाहिए। सुबह नहा धोकर तांबे के लोटे में जल भरकर लाल फूल कुमकुम काले तिल डालकर पितरों को याद करते हुए सूर्य देव को अर्पित करें। ऐसा करने से सूर्य देव और पितरों का आशीर्वाद मिलता है जिससे घर में सुख समृद्धि का वास होता है।

सूर्य की पूजा मौनी अमावस्या में क्यों की जाती है?

मौनी अमावस्या के दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है। जल चढ़ाते समय तांबे के लोटे में लाल पुष्प, लाल सिंदूर तथा काले तिल को भी डालें। इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं, जिससे हमारे पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है।

मौनी अमावस्या के दिन पीपल की पूजा क्यों होती है ?

मौनी अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना भी शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ-साथ अन्य देवताओ का भी वास होता हैं। इस उपासना तथा पूजा से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए अमावस्या के दिन पीपल में जल अर्पित किया जाता है।

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