सूर्य ग्रहण में गर्भवती महिला को सोना चाहिए या नहीं

गर्भवती महिला को ग्रहण में कैसे रहना चाहिए

गर्भावस्था महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण समय होता है और खुद की देखभाल करना बेहद जरूरी होता है। हालांकि, कई गर्भवती महिलाएं सूर्य ग्रहण जैसी प्राकृतिक घटनाओं के संभावित प्रभावों से अनजान हैं। इस वर्ष 20 अप्रैल को लगने वाला सूर्य ग्रहण ऐसी ही एक महत्वपूर्ण घटना है जिससे सभी गर्भवती महिलाओं को अवगत होना चाहिए।

आज के इस लेख मे हम 20 अप्रैल 2023 के सूर्य ग्रहण के समय, स्थान और सावधानियों के बारे में चर्चा करेंगे। साल का पहला सूर्य ग्रहण वैशाख अमावस्या यानी 20 अप्रैल दिन गुरुवार को लग रहा है। साल का यह पहला सूर्य ग्रहण ज्योतिषीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहेगा।

इस सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य मेष राशि में होंगे और ग्रहण के दो ही दिन बाद गुरु मेष राशि में आकर सूर्य से संयोग करेंगे। ऐसे में यह सूर्य ग्रहण कैसा रहेगा और इसका कैसा प्रभाव रहेगा, आइए जानते हैं इस लेख मे। इसके साथ ही इस आर्टिकल में हम जानेंगे की गर्भवती महिलाओ को ग्रहण काल के दौरान क्या करना चहिए और क्या नहीं ।

ऐसा माना जाता है कि सूर्य ग्रहण का गर्भवती महिलाओं और उनके अजन्मे बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए इस दौरान खुद का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। ग्रहण के समय पैदा हुए नवजात शिशुओं में कुछ जटिलताएं भी देखी गई हैं।

हालांकि इसके पीछे वैज्ञानिक या ज्योतिषीय तर्क हो सकते हैं, लेकिन मां और बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरतना ही सबसे अच्छा उपाय है। दोस्तों ग्रहण काल के नियमों के अनुसार सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है।

इस दौरान कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए । इस समय कुछ विशेष कार्यों को करने की मनाही होती है। ग्रहण काल एवं सुतक के समय गर्भवती बहनों को अपनी विशेष सुरक्षा करनी चाहिए।

सूर्यग्रहण कितने बजे से कितने बजे तक?

इस साल 20 अप्रैल को सूर्य पर लग रहा ग्रहण, उस दिन सुबह 7 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा और दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर खत्म होगा। सूर्य ग्रहण का खग्रास 8 बजकर 7 मिनट पर होगा। इस सूर्य ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 24 मिनट की होगी।

सूर्य ग्रहण में गर्भवती महिला को सोना चाहिए या नहीं

ग्रहण के समय सूर्य अपनी उच्च राशि में यानी मेष राशि में रहेंगे, जहां उनके साथ बुध और राहु भी रहेंगे। वहीं इस ग्रहण के दो दिन बाद ही गुरु का राशि परिवर्तन होने जा रहा है। ऐसे में ज्योतिषीय दृष्टि से साल का पहला सूर्य ग्रहण बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत में सूतक कब लगेगा

यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारतवर्ष मे इस ग्रहण का सूतक काल नहीं माना जाएगा। यह सूर्य ग्रहण न्यूजीलैंड, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण प्रशांत महासागर में दिखाई देगा। सूतक काल को एक प्रकार से अशुभ समय मानते हैं, इसमें कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य नहीं करते हैं।

ग्रहण के समापन के कुछ समय बाद सूतक काल का अंत होता है। जिस स्थान पर सूर्य ग्रहण दिखाई देता है, वहां पर सूतक काल मान्य होता है। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल यहाँ नहीं माना जाएगा। लेकिन हर खगोलीय घटना के ग्रहण काल के दौरान धार्मिक कार्य यानि पूजा-पाठ नहीं किए जाते हैं ग्रहण के दौरान मंदिरों के पट भी बंद रहते हैं ।

सूर्यग्रहण क्यों होता है

गर्भवती महिलाओं के साथ रोगियों को भी विशेष सावधानी सूर्य ग्रहण के दौरान रखनी होगी । इतना लंबा सूर्यग्रहण और उस पर सूर्य का अपनी राशि मेष में होना वैश्विक राजनीति में भी उथल-पुथल मचा सकता है । आसान भाषा में समझें तो जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तब चंद्रमा के पीछे सूर्य का बिंब कुछ समय के लिए पूरी तरह से ढक जाता है।

इस प्रक्रिया को ही सूर्य ग्रहण लगना कहते है। पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा के आ जाने से पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश नहीं पहुच पाता है, जिसके कारण कुछ समय के लिए पृथ्वी के कुछ हिस्से मे दिन के उजाले में ही अंधेरा दिखने लगता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी जब एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, तब सूर्य ग्रहण लगता है।

सूर्य ग्रहण में गर्भवती महिला को क्या करना चाहिए

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता रहता हैI यह नकारात्मक उर्जा व्यक्ति पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव डालती है । ग्रहण आंशिक हो यां पूर्ण होI दोनों का प्रभाव व्यक्ति पर पड़ता है ग्रहण का प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर ज्यादा होता है इस लिए इन्हें अपनी विशेष सुरक्षा करनी चाहिए। अब जानते है सावधानिया….

सूतक काल शुरू होने के पहले गर्भवती महिलाएं गंगाजल पीले । या तो आप तुलसी के पत्ते को अपने मुह में रखें अगर आप ऐसा करती हैं तो आपके गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षा होगी I ग्रहण और सूतक के समय एक नारियल पानी वाला नारियल अपने पास रखे और ग्रहण के बाद इसे अपने पास से हटा दे। आइए अब जानते हैं कि सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को और क्या करना चाहिए?

सूर्य ग्रहण में गर्भवती महिलाओं को क्या-क्या नहीं करना चाहिए

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है । उन्हें किसी भी तरह की धारदार चीजों को छूने की भी मनाही होती है। ग्रहण के समय चाकू-कैंची जैसी धारदार चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

किसी भी नुकीली चीज जैसे सुई आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, काटना या छीलने जैसे कार्य नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से अजन्मे बच्चों के अंगों को क्षति पहुंच सकती है। ध्यान रखें कि गर्भवती महिला को आंखों से ग्रहण को नहीं देखना चाहिए।

ग्रहण के समय में उत्सर्जित होने वाली नकारात्मक ऊर्जा गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान बाहर नहीं निकलना चाहिए। जब सूर्य ग्रहण प्रारंभ हो, तो उस समय से लेकर उसके समापन तक गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। ऐसा ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के लिए किया जाता है।

गर्भवती महिलाओं को सूर्य ग्रहण को नहीं देखना चाहिए। इससे उनकी सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। ग्रहण के दौरान आप मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करें क्योंकि ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती हैं जो हमारी आंखों को क्षति पहुंचाती है।

ग्रहण के दौरान जप और ध्यान करें। ग्रहण के समय आप भोजन ना करें क्योंकि शास्त्रों में बताया गया है कि ग्रहण के समय भोजन करने से व्यक्ति की बुद्धि और विवेक भ्रष्ट हो जातें है और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तो हम जानते ही हैं कि ग्रहण के समय खाया गया भोजन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है ।

लेकिन यदि कोई बीमार है, या बूढ़ा व्यक्ति है तो भोजन व पानी पीना उसके लिए बहुत ही आवश्यक होता है। ऐसी स्थिति मे सुबह के समय मे ही तुलसी का पत्ता पानी में व भोजन में डालकर रखें और बाद मे वही भोजन व पानी ग्रहण के समय पीएं ।

क्या गर्भवती महिलाएं तुलसी का पानी पी सकती हैं?

गर्भवती महिलाएं पीने के पानी में तुलसी का पत्ता डालकर रखें जहां तक हो सके ग्रहण के समय पानी व भोजन ना करें। कुछ परिवारों का मानना है कि गर्भवती महिला को ग्रहण के दौरान पानी नहीं पीना चाहिए। हालांकि, इससे आपको डिहाइड्रेशन का खतरा हो सकता है, विशेष रूप से  ग्रहण यदि गर्मियों में हो तो।

बहरहाल केवल 2-3 घंटे के लिए खाना न खाने से शायद कोई परेशानी न हो, मगर लंबे समय तक भूखे रहने से सिरदर्द, एसिडिटी के साथ-साथ गर्भावस्था में थकान और यहां तक कि बेहोशी भी हो सकती है। अगर, आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

मगर, इस बार भारत में सूतक काल मान्य नहीं रहेगाI यदि आप ग्रहण की अवधि के दौरान घर पर नहीं रह सकतीं और इससे जुड़े सामान्य नियमों का पालन नहीं कर सकतीं या फिर आप ऐसा करना नहीं चाहती हैं, तो भी फिक्र न करें। इस बार ग्रहण में बाहर निकलने से जरुरी नहीं है कि आपके शिशु को नुकसान पहुंचेगा या फिर वह किसी जन्मजात लक्षण के साथ पैदा होगा।

सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान कब करना चाहिए?

क्योंकि यदि सूतक काल लगा होता तो हमे सावधानी बरतनी जरुरी हो जाती है। लेकिन इस बार सूतक नहीं लग रहा है । हो सके तो ग्रहण के शुरू होने पर स्नान करें और ग्रहण के बाद भी स्नान करे। ध्यान रखें ग्रहण और सूतक के समय बालों को ना धोये और ग्रहण के समय  ब्रह्मचर्य का पालन करें।

यदि आप ब्रह्मचर्य का पालन नहीं करते हैं तो यह आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है । ग्रहण के समाप्त होने पर दान करें हिंदू धर्म में दान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ग्रहण  के समय किया गया जप तप  10000 गुना अधिक फल देता है या साल भर किए हैं पूजा-पाठ के बराबर होता है।

इन सभी बातों का ध्यान आप सूर्य ग्रहण के समय रखें। 20 अप्रैल 2023 का सूर्य ग्रहण एक महत्वपूर्ण घटना है जिससे सभी गर्भवती महिलाओं को अवगत होना चाहिए। हाँलाकी भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, फिर भी इस दौरान कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है। ऐसा करके आप अपनी और अपने होने वाले बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

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